वैदिक भौतिकी अनुसंधान केंद्र का संक्षिप्त परिचय

यह ट्रस्ट एक पंजीकृत ट्रस्ट, श्री वैदिक स्वस्ति पंथा न्यास द्वारा चलाया जा रहा है। श्रदेय श्री स्वामी धर्मबंधु, गुजरात की सलाह और सहायता से सन् 01.05.2003 को यह ट्रस्ट श्रदेय श्री आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक द्वारा आर्य समाज मंदिर, भीनमाल में स्थापित किया गया है। बाद में इस ट्रस्ट सेे श्री आचार्य स्वदेश जुड़ गए। दोनों विद्वान कई वर्षों तक मुख्य संरक्षक और संरक्षक रहे। इस ट्रस्ट का विलेख 02.07.2003 को डिप्टी रजिस्ट्रार, भीनमाल (जालोर) द्वारा पंजीकृत किया गया है। बाद में यह ट्रस्ट देवस्थान विभाग, राजस्थान में 28.12.2011 को पंजीकरण संख्या 06/2011 /जालोर के तहत पंजीकृत है। इस ट्रस्ट की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट नियमित रूप से आयकर विभाग, भारत और देवस्थान विभाग, राजस्थान को भेजी जाती है। आयकर विभाग ने 1961 से आयकर नियम 1961, धारा 80 जी के तहत इस ट्रस्ट को किए गए दान पर रियायत शुरू करता है, जिसे 1 अप्रैल 2010 से स्थायी किया गया है।

ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, हमारे मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं -

1. वेद संरक्षण अभियान।
2. कृषि-गाय-पर्यावरण संरक्षण अभियान।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा अभियान।
4. सामाजिक सुधार अभियान।
5. आर्य-वीर दाल अभियान।

          ये अभियान अक्टूबर 2004 से पाली-मारवाड़ में एक किराए के घर से शुरू किया गया था। बाद में इस ट्रस्ट के प्रधान कार्यालय को भीनमाल में स्थानांतरित कर दिया गया था। उसके बाद, ट्रस्टियों और अन्य दानदाताओं की मदद से हमने भीनमाल के पास भागल-भीम में वेद विज्ञान मंदिर (वैदिक और आधुनिक भौतिकी अनुसंधान केंद्र) का निर्माण किया। जून 2008 से हेड-क्वार्टर यहाँ से संचालित किया जा रहा है।

         यह ज्ञात है कि यह भूमि जुलाई 2005 में खरीदी गई थी। इस ट्रस्ट के संरक्षक मंडल में 39 ट्रस्टी और कई प्रसिद्ध व्यक्ति हैं। संस्थान के प्रमुख के साथ-साथ आचार्य के दायित्व श्री आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक पर हैं।

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