शोध के विषय

ब्रह्माण्ड विज्ञान

सृष्टि उत्पत्ति के प्रारम्भ से लेकर तारों के निर्माण तक की प्रक्रिया का विस्तृत विज्ञान। वास्तविक डार्क मैटर व डार्क एनर्जी की उत्पत्ति, संरचना एवं क्रियाविज्ञान। आचार्य जी की Vaidic Rashmi Theory of Universe आधुनिक भौतिकी की Big Bang theory, Eternal Universe theory,  Big Bang Cycle आदि सभी की गम्भीर समीक्षा करती हुई सबके दोषों को दूर करने वाली अभूतपूर्व थ्योरी है, जिससे ब्रह्माण्ड को समझने की सर्वथा दिव्य कुंजी प्राप्त हो सकेगी।

खगोल भौतिकी

तारों व ग्रहों के निर्माण का प्रारम्भ, उनकी सम्पूर्ण संरचना, संचालन, परिक्रमण, घूर्णन आदि का विस्तृत क्रियाविज्ञान। गैलेक्सियों का निर्माण, तारों व ग्रहों आदि की कक्षाओं के निर्माण की प्रक्रिया। तारों के केन्द्रीय भागों में होने वाली नाभिकीय संलयन का विशेष क्रिया विज्ञान।

कण भौतिकी

मूलकणों व क्वाण्टाज् का निर्माण व संरचना, Atoms व Molecules का निर्माण।

क्वांटम फील्ड थ्योरी

विभिन्न विद्युत् आवेशित अथवा निरावेशित कणों एवं क्वाण्टाज् आदि के मध्य interaction का विस्तृत क्रिया विज्ञान so called virtual (mediator) particles की संरचना व क्रिया विज्ञान। Vaidic Rashmi Theory of Universe में बलों के स्वरूप व क्रिया विज्ञान का वह वर्णन है, जिसे पढ़कर वर्तमान भौतिक विज्ञानी हतप्रभ रह जाएंगे। gravity, mass, electric charge आदि का स्वरूप, उसका कारण व क्रियाविज्ञान।

स्ट्रिंग सिद्धांत

इसके स्थान पर हम वैदिक छन्द एवं प्राण रश्मि सिद्धांत (Vaidic Chhand and Pran Rashmi Theory) का विस्तृत एवं अभूतपूर्व क्रियाविज्ञान प्रस्तुत करेंगे। इससे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के विज्ञान को सर्वथा नवीन परन्तु वस्तुतः वैदिक सनातन दिशा प्राप्त होगी। gravitons का स्वरूप, संरचना एवं क्रियाविज्ञान।

प्लाज्मा भौतिकी

तारों के अन्दर होने वाली विभिन्न गतिविधियों का विज्ञान।

ईश्वर-तत्त्व विज्ञान

सम्पूर्ण सृष्टि के निर्माण, संचालन एवं प्रलय आदि में ईश्वर के अस्तित्व एवं स्वरूप की वैज्ञानिकता, उसका सम्पूर्ण क्रियाविज्ञान। यह विज्ञान वर्तमान भौतिक शास्त्रियों के साथ विश्व के अति प्रबुद्ध धर्माचार्यों के लिये अति आश्चर्य का विषय होगा। इससे अध्यात्म के साथ-2 भौतिकी की भी दिशा बदल जाएगी।

भाषा की उत्पत्ति

संसार में भाषा एवं ज्ञान की उत्पत्ति का विशिष्ट विज्ञान, वेद तथा उसके भाष्य का यथार्थ स्वरूप। इससे संसार के वेदानुसंधाताओं की दिशा सर्वथा बदल जायेगी और उन्हें ऋषियों की पुरातन व सनातन वैज्ञानिक परम्परा का बोध होगा।

समय और स्थान

काल (Time) एवं आकाश (Space) का स्वरूप एवं क्रिया विज्ञान। यह विषय वर्तमान भौतिक शास्त्रियों के साथ-2 उच्च कोटि के दार्शनिकों के लिए भी कुतूहल का विषय होगा।

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