मैं वैदिक विज्ञान के द्वारा एक अखण्ड, सुखी व समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला रखने का प्रयास कर रहा हूँ, जिसमें प्रत्येक भारतीय तन, मन, विचारों व संस्कारों से विशुद्ध भारतीय होगा। उसके पास अपना विज्ञान वेदों, ऋषियों व देवों के प्राचीन विज्ञान पर आधारित एवं अपनी भाषा हिन्दी व संस्कृत में होगा। उसे अपने पूर्वजों की प्रतिभा, चरित्र एवं संस्कारों पर गर्व होगा, उसे पाश्चात्य विद्वानों की बौद्धिक दासता से मुक्ति मिलेगी, जिससे लार्ड मैकाले का वर्तमान में साकार हो चुका स्वप्न ध्वस्त हो सकेगा। यह प्यारा राष्ट्र पुनः विश्वगुरु बनकर विश्व को शान्ति एवं आनन्द का मार्ग दिखाएगा।

-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

(ऐतरेय ब्राह्मण की  वैज्ञानिक व्याख्या)

वेदविज्ञान-आलोकः

वेद संसार के सबसे प्राचीन एवं सनातन ग्रन्थ हैं। इन्हें समझने के लिए प्राचीन ऋषियों ने इनके व्याख्यान रूप अति महत्वपूर्ण ग्रन्थ, ब्राह्मण ग्रन्थों की रचना की। इनमें ऋग्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ महर्षि ऐतरेय महीदास जी द्वारा लगभग 7000 वर्ष पूर्व रचा गया, इसका नाम ऐतरेय ब्राह्मण है। यह ब्राह्मण ग्रन्थ सबसे प्राचीन ब्राह्मण ग्रन्थ है। ब्राह्मण ग्रन्थों की भाषा अति जटिल व सांकेतिक होने से ये ग्रन्थ सदैव रहस्यमय रहे। देश व विदेश के प्रायः सभी भाष्यकारों ने इनकी कर्मकांडपरक व्याख्या की। पूज्य आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक ने इस ग्रन्थ का संभवतः विश्व में प्रथम बार वैज्ञानिक भाष्य किया है। इस भाष्य का नाम वेदविज्ञान-आलोकः है, जो चार भागों में 2800 पृष्ठों में प्रकाशित हुआ है। वेदविज्ञान-आलोकः केवल सृष्टि उत्पत्ति का ही विज्ञान नहीं, बल्कि सृष्टि विज्ञान के विभिन्न पक्षों यथा- astrophysics, cosmology, quantum field theory, string theory, particle physics, atomic and nuclear physics आदि का विवेचक ग्रन्थ है।

Acharya Agnivrat Naishthik

Acharya Agnivrat Naishthik (Chairman, Vaidic and Modern Physics Research Centre) is a Vaidic Scientist and author of ‘Ved Vigyan Alok’. He is doing research on Aitreya Brahmin for 8-10 years. The Aitreya Brahmin is the Brahmin text of Rigveda (the oldest book of the world). The language of this book is indicative and very complex. He has made scientific interpretation of the Aitreya Brahmin, named ‘Ved Vigyan-Alok’ consists 2800 pages. 

Acharya Ji’s work in my view

Aitrey Brahmin is the Brahmanical text of Rigveda and Rigveda is considered the text of knowledge. Without understanding Aitrey Brahmin, we can’t understand Rigveda fully. Aitrey Brahmin, which is written approx. 7000 years ago, not understood by anyone yet. By understanding such a serious science, mysterious and complex text, 

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