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वैदिक भौतिकी

हमारी संस्था

श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास

इस संस्थान का संचालन एक पंजीकृत न्यास (ट्रस्ट) श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास द्वारा किया जा रहा है। इस न्यास की स्थापना पूज्य श्री आचार्य अग्निव्रत जी नैष्ठिक ने राजकोट (गुजरात) के पूज्य आचार्य (स्वामी) श्री धर्मबन्धु जी के परामर्श व सहयोग से वैशाख अमावस्या वि.सं. 2060 तदनुसार 01.05.2003 को आर्य समाज मंदिर, भीनमाल में की।

वैदिक एवं आधुनिक भौतिक अनुसंधान संस्थान

हम जिन विषयों पर काम कर रहे हैं, वे हैं -


कॉस्मोलॉजी, एस्ट्रोफिजिक्स, पार्टिकल फिजिक्स, क्वांटम फील्ड थ्योरी, प्लाज्मा फिजिक्स, ईश्वर-तत्व विज्ञान, भाषा की उत्पत्ति और समय तथा स्थान ...

संस्था के प्रमुख स्तम्भ

  • माननीय डॉ. सत्यपाल सिंह

    (मुख्य संरक्षक)

    संसद सदस्य, बागपत (उ.प्र.)
    गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति
    उच्च शिक्षा में पूर्व एमओएस, भारत सरकार
    पूर्व पुलिस कमिश्नर, मुंबई

  • आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

    (अध्यक्ष  एवं आचार्य)

    वैदिक वैज्ञानिक और वेदविज्ञान-आलोक (ऐतरेय ब्राह्मण की वैज्ञानिक व्याख्या) के लेखक

    वैदिक रश्मि थ्योरी

    (ब्रह्माण्ड का वैदिक सिद्धान्त) के प्रतिपादक

मेरा उद्देश्य

मैं वैदिक विज्ञान के द्वारा एक अखण्ड, सुखी व समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला रखने का प्रयास कर रहा हूँ, जिसमें प्रत्येक भारतीय तन, मन, विचारों व संस्कारों से विशुद्ध भारतीय होगा। उसके पास अपना विज्ञान वेदों, ऋषियों व देवों के प्राचीन विज्ञान पर आधारित एवं अपनी भाषा हिन्दी व संस्कृत में होगा। उसे अपने पूर्वजों की प्रतिभा, चरित्र एवं संस्कारों पर गर्व होगा, उसे पाश्चात्य विद्वानों की बौद्धिक दासता से मुक्ति मिलेगी, जिससे लार्ड मैकाले का वर्तमान में साकार हो चुका स्वप्न ध्वस्त हो सकेगा। यह प्यारा राष्ट्र पुनः विश्वगुरु बनकर विश्व को शान्ति एवं आनन्द का मार्ग दिखाएगा।

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वेदविज्ञान-आलोकः

वेद संसार के सबसे प्राचीन एवं सनातन ग्रन्थ हैं। इन्हें समझने के लिए प्राचीन ऋषियों ने इनके व्याख्यान रूप अति महत्वपूर्ण ग्रन्थ, ब्राह्मण ग्रन्थों की रचना की। इनमें ऋग्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ महर्षि ऐतरेय महीदास जी द्वारा लगभग 7000 वर्ष पूर्व रचा गया, इसका नाम ऐतरेय ब्राह्मण है। यह ब्राह्मण ग्रन्थ सबसे प्राचीन ब्राह्मण ग्रन्थ है। ब्राह्मण ग्रन्थों की भाषा अति जटिल व सांकेतिक होने से ये ग्रन्थ सदैव रहस्यमय रहे। देश व विदेश के प्रायः सभी भाष्यकारों ने इनकी कर्मकांडपरक व्याख्या की। पूज्य आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक ने इस ग्रन्थ का संभवतः विश्व में प्रथम बार वैज्ञानिक भाष्य किया है। इस भाष्य का नाम वेदविज्ञान-आलोकः है, जो चार भागों में 2800 पृष्ठों में प्रकाशित हुआ है। वेदविज्ञान-आलोकः केवल सृष्टि उत्पत्ति का ही विज्ञान नहीं, बल्कि सृष्टि विज्ञान के विभिन्न पक्षों यथा- astrophysics, cosmology, quantum field theory, string theory, particle physics, atomic and nuclear physics आदि का विवेचक ग्रन्थ है।

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किसी भी प्रश्न के लिए, कृपया कॉल करें: +919829148400 या निम्नलिखित फ़ॉर्म भरें

कार्यालय

श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास 

वेद विज्ञान मंदिर, गाँव- भागल भीम

भीनमाल (जिला- जालोर), Rajasthan - 343029 

Email : info@vaidicphysics.org

Phone : 9829148400, 02969222103

समय

9:00 am – 5:00 pm

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